हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आयतुल्लाह मुज्तहेदी तेहरानी (रह.) ने अपनी नैतिक नसीहतों में कहा कि कुछ लोग शैतानी वसवसों का शिकार हो जाते हैं और उनके मन में अल्लाह के अस्तित्व, पैगंबर-ए-अकरम (स.) की सच्चाई तथा क़यामत के बारे में संदेह पैदा होने लगते हैं।
उन्होंने बताया कि ऐसे लोग इन विचारों को दूर करने की कोशिश करते हैं, लेकिन कई बार उन्हें सफलता नहीं मिलती। ऐसी स्थिति में उन्हें “ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलीय्यिल अज़ीम” का अधिक से अधिक पाठ करना चाहिए।
आयतुल्लाह मुज्तहिदी तेहरानी (रह.) ने आगे कहा कि कुछ लोग शैतानी वसवसों से परेशान होकर उनके पास आते थे, तो वे उन्हें यही ज़िक्र पढ़ने की नसीहत करते थे।
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